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Haryana Group C Court Case Update: हरियाणा के ग्रुप सी के 20,000 पदों पर एक बार फिर लटकी तलवार, हाई कोर्ट ने नियुक्ति पर लगाई रोक।

Haryana Group C Court Case Update: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 1 फरवरी को एचएसएससी पर ग्रुप सी के 20,000 पदों का परिणाम जारी करने पर लगा दी थी रोक। फिर हरियाणा सरकार की उंडरटेकिंग के बाद, 5 फरवरी को उच्च न्यायालय ने रोक हटा दी थी। रोक हटते ही एचएसएससी ने ग्रुप सी की 59 श्रेणियों के 10,000 पदों का परिणाम जारी कर दिया था। अब एक बार फिर यचिकाकर्ता ने मेरिट में होते हुए नियुक्ति ना देने का लगाया आरोप।

Haryana Group C Court Case Update

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हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के ग्रुप सी के 20 हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर तलवार लटक गई है। भर्ती के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार और कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी कर नियुक्ति पर रोक लगा दी है।

आपको विदित होगा कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 1 फरवरी को एचएसएससी पर ग्रुप सी के 20,000 पदों का परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी। फिर हरियाणा सरकार की उंडरटेकिंग के बाद, 5 फरवरी को उच्च न्यायालय ने रोक हटा दी थी। रोक हटते ही एचएसएससी ने ग्रुप सी की 59 श्रेणियों के 10,000 पदों का परिणाम जारी कर दिया था।

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अब एक बार फिर भर्ती अधर में लटकती नजर आ रही है, परिणाम जारी होने के बाद जींद निवासी सुमित और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि मेरिट में होने के बाद भी एचएसएससी ने उन्हें नियुक्ति के लिए योग्य नहीं माना है। इन्होंने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार ग्रुप सी के 32 हजार पदों पर भर्ती कर रही है। भर्ती के दौरान उन्होंने आयोग की वेबसाइट पर आवेदन किया, लेकिन तकनीकी खमियों के कारण आवेदन दर्ज नहीं हुआ। इसके चलते वे योग्य होते हुए भी विभिन्न पदों के लिए आवेदन नहीं कर पाए।

याचिकाकर्ता ने कि परिणाम रद्द करने की मांग

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण योग्य उम्मीदवारों के दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड नहीं होने के कारण कर्मचारी आयोग ने उन्हें अंकों का लाभ नहीं दिया। इससे वह अधिक अंक होते हुए भी मेरिट लिस्ट से बाहर हो गए और कम अंक वालों का नाम नियुक्त होने वालों की लिस्ट में आ गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि आयोग को इसकी शिकायत भी की गई लेकिन उनकी शिकायत पर कोई उचित कार्यवाही नहीं की गई।

याचिकाकर्ता ने माननीय हाईकोर्ट से जारी परिणाम को रद्द करके और तकनीकी गड़बड़ी दूर करने के बाद नए सिरे से परिणाम घोषित करने की मांग की है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर दिया है। याचिकाकर्ता के वकील जसबीर मोर ने बताया कि हाईकोर्ट ने आयोग इस खामी को देखते हुए एक तकनीकी कमेटी बनाने का निर्णय लिया है जिसमें हाईकोर्ट के तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।

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